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007 नियमसार जी कारण शुद्ध पर्याय जाम नगर 2011 यशस्वी आ०बा०ब्र० संध्या बहन जैन “दीदीश्री” (शिकोहाबाद)

नियमसार में आलोचना का वास्तविक स्वरूप: सहज अवलोकन से आत्मानुभव की ओर जैन दर्शन में आत्मा की शुद्धता, समता और […]

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006 नियमसार जी कारण शुद्ध पर्याय जाम नगर 2011 यशस्वी आ०बा०ब्र० संध्या बहन जैन “दीदीश्री” (शिकोहाबाद)

कारण दृष्टि क्या है? जैन दर्शन में शुद्ध आत्मा का यथार्थ श्रद्धान जैन दर्शन में आत्मा को समझने का सबसे

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004 नियमसार जी कारण शुद्ध पर्याय जाम नगर 2011 यशस्वी आ०बा०ब्र० संध्या बहन जैन “दीदीश्री” (शिकोहाबाद)

कारण दृष्टि और सहज सम्यक दर्शन : आत्मा का असली परिचय जैन दर्शन में बार-बार एक बात समझाई जाती है

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005 नियमसार जी कारण शुद्ध पर्याय जाम नगर 2011 यशस्वी आ०बा०ब्र० संध्या बहन जैन “दीदीश्री” (शिकोहाबाद)

कारण दृष्टि और त्रिकाल सम्यक दर्शन: जैन धर्म में आत्मा का अनुभव परिचय: कारण दृष्टि का महत्व जैन धर्म में

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003 नियमसार जी कारण शुद्ध पर्याय जाम नगर 2011 यशस्वी आ०बा०ब्र० संध्या बहन जैन “दीदीश्री” (शिकोहाबाद)

97वीं गाथा का गहरा रहस्य – “मैं सदा मुक्त कारण परमात्मा हूँ” जैन आगमों में आत्मा के वास्तविक स्वरूप को

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002 नियमसार जी कारणशुद्धपर्याय जाम नगर 2011 यशस्वी आ० बा०ब्र० संध्या बहन जैन “दीदीश्री” (शिकोहाबाद)

जैन दर्शन में आत्मा का स्वभाव और अनंत चतुष्टय का रहस्य जैन दर्शन में आत्मा को अनादि-अनंत, शुद्ध और चेतन

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001 नियमसार जी कारण शुद्धपर्याय जाम नगर 2011 यशस्वी आ० बा०ब्र० संध्या बहन जैन “दीदीश्री” (शिकोहाबाद)

शुद्ध निश्चय नियम का सच्चा स्वरूप – आत्मा के नित्य आनंद का अनुभव जैन दर्शन के महान ग्रंथ नियमसार में

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प्रतिमा प्रक्षाल पाठ/जलाभिषेक पाठ । Pratima Prakshal Paath (Abhishek Path)

जलाभिषेक वा प्रक्षाल पाठ (दोहा)जय-जय भगवंते सदा, मंगल मूल महान।वीतराग सर्वज्ञ प्रभु, नमौं जोरि जुगपान।।(ढाल मंगल की, छंद अडिल्ल और

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